90 फीसदी व्यापारियों को जीएसटी रिटर्न से मिली राहत व्यापारियों की दिक्कतें दूर

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जीएसटी काउंसिल ने बड़ी राहत दी
जीएसटी काउंसिल ने बड़ी राहत दी

जीएसटी लागू होने के बाद छोटे और मझोले व्यापारियों की दिक्कतें दूर करने के लिए जीएसटी काउंसिल ने बड़ी राहत दी है।अब 90 फ़ीसदी व्यापारियों को हर महीने जीएसटी का रिटर्न दाखिल नहीं करना पड़ेगा।केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में जीएसटी काउंसिल की 22वी बैठक में शुक्रवार को छोटे और मझोले व्यापारियों को राहत देने के इरादे से दो अहम फैसले किए गए,साथ ही जीएसटी लागू होने के बाद नगदी के संकट से जूझ रहे निर्यातको भी बड़ी राहत देने का निर्णय किया।मौजूदा सीमा सालाना 75लाख रुपये टर्नओवर को बढ़ाकर 1करोड़ रुपए करने के तौर पर किया।वही दूसरा निर्णय सालाना डेढ़ करोड़ रुपए तक टर्नओवर वाले व्यापारियों के लिए हर माह रिटर्न दाखिल करने की बाध्यता को खत्म करने का किया।वित्त मंत्री का कहना है कि काउंसिल के इस निर्णय के बाद जीएसटी में पंजी कृत 90% कारोबारियों को हर माह रिटर्न भरने की जरुरत नहीं पड़ेगी।यह 3 माह में एक बार रिटर्न दाखिल कर सकेंगे,साथ ही कंपोजीशन स्कीम के तहत जुलाई-सितंबर की तिमाही का रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 15 नवंबर कर दिया गया है।स्कीम के तहत पंजीकृत व्यापारी Advance लेते हैं,तो इस पर टैक्स नहीं देना पड़ेगा।कौंसिल ने दूसरा अहम निर्णय जीएसटी लागू होने के बाद रिफंड की समस्या से जूझ रहे निर्यातकों को राहत देने के लिए किया।निर्यातकों को मार्च 2018 तक जीएसटी लागू होने से पूर्व की भांति आई जीएसटी से छूट प्राप्त रहेगी और उसके बाद उनके रिफंड की व्यवस्था के लिए ई-वॉलेट की व्यवस्था होगी। यह व्यवस्था 1 अप्रैल 2018 से शुरू होगी हालांकि घरेलू निर्माताओं के निर्यात के लिए माल खरीदने वाले निर्यातकों को 0.1 प्रतिशत की दर से मामूली जीएसटी का भुगतान करना होगा।कौंसिल ने रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म के तहत गैर पंजीकृत डीलरो  से कर योग्य वस्तुओं या सेवाओं खरीदने पर टैक्स देने की जिम्मेदारी खरीददार की होने संबंधी सी जीएसटी कानून की धारा को भी 30 मार्च 2018 तक लागू ना करने का निर्णय किया है।सेवाएं देने वाले ऐसे व्यापारी जिनका कारोबार 2लाख  रुपए से कम है लेकिन वह दूसरे राज्यों में व्यापार करते हैं,उन्हें जीएसटी में पंजीयन नहीं करवाना होगा।

 

 

 

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