समय रहते हो जाएं सचेत

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समय रहते हो जाएं सचेत

आज की जीवनशैली के साथ सबसे बड़ी दिक्कत यही है कि लोग बहुत व्यस्त हैं।फिर भी उनकी दिनचर्या से फिजिकल एक्टिविटीज खत्म होती जा रही है।शुरुआत में एहसास नहीं होता लेकिन कुछ वर्षों के बाद इसी वजह से लोगों की सेहत में गिरावट आने लगती है।आजकल कंप्यूटर और स्मार्टफोन के साथ ज्यादा वक़्त बिताने की वजह से लोगों की आंखों में रूखापन, दर्द, जलन, खुजली और नजर में धुंधलापन जैसी समस्याएं पैदा होती हैं जो डिजिटल विजन सिंड्रोम का लक्षण हो सकती हैं।पलकें झपकना एक संभावित क्रीया है।आमतौर पर व्यक्ति 1 मिनट में 20 से 25 बार पलकें झपकाता है।इससे आंखों में आंसू की नई परते जमती जाती हैं, जो प्राकृतिक रूप से उसकी नमी बरकरार रखती हैं लेकिन कंप्यूटर पर काम करते समय लोग 1 मिनट में केवल पांच छह बार ही पलकें झपका पाते हैं।इससे आंखों में ड्राइनेस बढ़ने लगती है और आई मसल्स पर भी जोर पड़ता है।नजरों में धुंधलापन और सिर दर्द की समस्या भी हो सकती है।

क्या करें: कंप्यूटर पर काम करते हुए सचेत एकदम से बीच-बीच में पलकें झपकते रहे।

आप के वर्क स्टेशन के आसपास संतुलित और सही प्रकाश व्यवस्था हो।

कंप्यूटर सक्रिन और आंखों के बीच कम से कम 20-22 इंच की दूरी होनी चाहिए।

कंप्यूटर पर एंटीगलेयर स्क्रीन का प्रयोग भी इस समस्या से बचाव में मददगार होता है।

डॉक्टर की सलाह पर आंखों के लिए लुब्रिकेंट आई ड्राप का इस्तेमाल भी फायदेमंद साबित होता है।

रात को सोने से एक घंटा पहले मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल बंद कर दे।

साल में कम से कम एक बार रूटीन आई चेकअप अवश्य करवाएं।

सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस

देश में लगभग 70 फ़ीसदी लोग इस समस्या से पीड़ित हैं।कंप्यूटर पर लगातार देर तक काम करने वाले लोग को गलत पोसचर की वजह से यह समस्या ज्यादा परेशान करती है।काम करते समय जल्दबाजी के दबाव में अक्सर लोग सामने की ओर झुक जाते हैं।इससे उन की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है जो उनकी गर्दन, कंधे और पीठ में दर्द का कारण बन जाता है।गंभीर स्थिति में इस वजह से लोगों को सिर दर्द चक्कर आना और कई समस्याएं हो सकती हैं।

क्या करें: कंप्यूटर पर काम करते समय कोशिश यही होनी चाहिए कि आपकी पीठ और गर्दन हमेशा सीधी रहे।अपने लिए ऐसी मेज और कुर्सी का चुनाव करें, जिस पर काम करते समय आपको आगे की ओर झुकना ना पड़े, हालांकि आजकल कंपनियों में भी इस बात के प्रति जागरूकता बढ़ गई है।इस बात के प्रति हमेशा सचेत रहें कि आप का बिस्तर ना तो अधिक सख्त और ना ही मुलायम हो।

बेहतर यही होगा कि सोते समय तकिए का इस्तेमाल ना किया जाए इसके बिना आपको सोने में तकलीफ होती है तो ध्यान रखें कि आपका किया बहुत ऊंचा न हो।

नियमित योगाभ्यास समस्या का सही समाधान है मकरासन भुजंगासन और अर्थ नौकासन और सूर्य नमस्कार करने से काफी राहत मिलती है।

ऑस्टियोपोरोसिस

यह एक ऐसी समस्या है जिसमें कैल्शियम की कमी की वजह से हड्डियां घिस कर इतनी कमजोर हो जाती है।चोट लगने पर भी टूट जाती हैं अब तक बढ़ती उम्र से जुड़ी बीमारियां समझते थे,लेकिन आज कल काम काजी युवा पीढ़ी में भी इसके लक्षण नजर आने लगे हैं।खान पान में कैल्शियम और प्रोटीन की कमी अल्कोहल और सिगरेट का अधिक मात्रा में सेवन इसके प्रमुख कारण है इसके इलावा अधिक मात्रा में तेल-घी और चाय-कॉफी के सेवन से आंतो में पोषक तत्वों को ग्रहण करने की क्षमता खत्म हो जाती है,जिससे कैल्शियम और मिनरल्स का आवशोषण नहीं कर पाती,जिससे लोगों के शरीर में तत्वों की कमी हो जाती है। इसके इलावा सूरज की रोशनी विटामिन डी का सबसे अच्छा स्रोत है।

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