कहानी परोपकार का फल

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परोपकार का फल
परोपकार का फल

कहानी

एक समय की बात है। भारत के एक छोटे से राज्य ढूंढी में एक राजा राज करते थे।उन के तीन बेटे थे अमरेंद्र महेंद्र और पुष्पेंद्र राजा अब बूढ़े हो रहे थे।उन्होंने सोचा कि अपना राजकाज बेटों को सौंपकर तीर्थ यात्रा पर निकला जाए।लेकिन उससे पहले यह करना होगा कि तीनों राजकुमारों में से किसे राजा बनाया जाए उनके तीनों बेटे रंग रूप में एक समान सुंदर थे पढ़ाई में युद्ध कला में भी समान रूप से पारगत थे। राजा अपना राज्य उसी बेटे को देना चाहते थे। जिसमें पूरे राज्य की जिम्मेदारी उठाने की ताकत हो और जो राज्य और प्रजा का ध्यान समय से ज्यादा रखें ।वह स्वार्थी बिल्कुल भी ना हो इसलिए उन्होंने अपने तीनों बेटों की परीक्षा लेने की योजना बनाई उन तीनों को अपने पास बुला कर उन्होंने कहा कि मेरे पास तीन पोटलिया है एक बेशुमार धन दौलत एक में हीरे जवाहरात और एक में फल फूल और अनाज के बीज हैं मैं तुम तीनों को इन तीनों पोटलियों से बराबर-बराबर चीजें निकाल कर दे रहा हूं। मैं साल भर के लिए भ्रमण पर निकल रहा हूं। वापस आकर देखूंगा कि तुमने इन चीजों का प्रयोग किस तरह किया है। राजकुमार अमरेंद्र पोटली पाकर बहुत खुश हुए। उन्होंने तय किया कि वे इन पैसों से अपने लिए एक बहुत सुंदर महल बनाएंगे। जिसमें वे बहुत आराम से रहेंगे। उन्होंने हीरे जवाहरात से अपने लिए कीमती मुकुट बनाने की सोची और फल-फूल, अनाज के बीज को उन्होंने फेंक दिया। महेंद्र ने धन दोलत से एक सुंदर दुकान खोली और हीरे-जवाहरात से उन्होंने गहनों का व्यवसाय शुरू किया। फल फूल के बीज उन्होंने अपनी दुकान के पास लगाए और अनाज सस्ते दामों पर अनाज मंडी में बेच दिया। पुष्पेंद्र ने जब पैसे देखे, तो सबसे पहले उन्होंने महामंत्री से पूछा कि क्या राज्य के खजाने में कितने पैसे हैं कि पिता की अनुपस्थिति में राज्य का खर्चा चल सके? मंत्री ने जवाब दिया कि खजाने में इतने पैसे नहीं है, तो उन्होंने अपने पास हीरे की एक अंगूठी रखी और अपना पूरा धन खजाने में जमा करवा दिया ।उन्होंने महामंत्री से बताया कि मां को देने के लिए ही उठी रखी है। यह राज्य का धन है, इसलिए इसकी कीमत में कुछ दिनों वापस कर दूंगा। इसके बाद पुष्पेंद्र ने माली को बुलाया और उन्हें फल और फूल के बीज देते हुए कहा कि इन्हें सड़कों के किनारे बो दे।अनाज के बीज लेकर वे स्वयं एक किसान के पास गए और उनसे कहा कि मैं यह भी आपके खेतों में बोना चाहता हूं। बुनाई के बाद के सभी कामों में आपके साथ करना चाहता हूं। जो भी अनाज उपजेगा ,उसका एक भाग् मैं और आप रख लेंगे और एक भाग राज्य के भूखे लोगों को दे देंगे।
1 साल बाद जब राजा लौटे तो उन्होंने देखा कि राज्य की सड़कों के किनारे फूल खिले हैं और फलों के छोटे छोटे पौधे भी उगे हुए हैं। राज्य में एक भिखारी नजर नहीं आ रहा है। आगे जाकर उन्होंने देखा कि बाजार में एक बहुत बड़ी दुकान बनी हुई है और महेंद्र गाड़ी पर बैठ कर पैसे गिन रहे हैं। पैसे गिनने में इतने व्यस्त थे कि उन्हें राजा के आने का पता नहीं चला। आगे बढ़ने पर राजा को राजकुमार अमरेंद्र का खूबसूरत महल दिखाई दिया। जब राजा ने राज कुमार के बारे में पूछा तो द्वारपाल से पता चला कि वह सो रहे हैं।द्वारपाल ने बताया कि राजकुमार दिन भर सोते हैं या खाते रहते हैं। राजा को महामंत्री से पता चला के राजकुमार पुष्पेंद्र ने अपने धन दोलत की पोटली राज खजाने में जमा करा दी है राजा के दिए हुए बीज से और नए बीज तैयार कर आए राजकुमार ने गरीब किसानों को मुफ्त बीज मानने का नियम बना लिया है राजा ने निश्चय किया कि जो अपने बारे में न सोचे और देश में प्रजा के हित के बारे में सोचें तो वही सच्चा राजा हो सकता है राजकुमार पुष्पेंद्र को राजा घोषित कर दिया गया।

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