जैसी उम्र वैसी डाइट

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जैसी उम्र वैसी डाइट
जैसी उम्र वैसी डाइट

जैसी उम्र वैसी डाइट

हम जो भी डाइट लेते हैं,उसका सीधा प्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है लेकिन क्या उस से हमारे शरीर को सही पोषण मिल पाता है? जरूरी है कि उम्र के साथ होने वाले परिवर्तनों के हिसाब से डाइट में भी उचित बदलाव लाया जाए। शरीर को सक्रिय और स्वस्थ रखने के लिए उम्र के मुताबिक कैसा हो आपका खानपान जानिए ?

अक्सर अपने बड़ों को कहते सुना होगा जैसा खाओगे अन्न वैसा रहेगा तन।हर उम्र के अनुसार शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए अलग-अलग पोषक तत्वों की जरूरत होती है।50 की उम्र में 25 की तरह आहार नहीं लिया जा सकता। हमारे खाने में कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन के साथ ही माइक्रोन्यूट्रीएट्स का भी बहुत महत्वपूर्ण स्थान होता है। ऐसे में जरूरी है कि अपनी उम्र के हिसाब से खानपान के तौर-तरीकों में भी परिवर्तन लाया जाए।जानते हैं कि किस अवस्था में कैसा पोषण लेना चाहिए।

5 वर्ष तक

इस उम्र में बच्चों का शारीरिक एवं मानसिक विकास बहुत तेजी से होता है। ऐसे में उन्हें कार्बोहाइड्रेट और वसा संतुलित रुप से मिलना चाहिए। साथ ही मानसिक विकास के लिए माइक्रोन्यूट्रिएंट्स भी बहुत जरूरी होते हैं। सब्जियां आदि इसके मुख्य स्रोत हैं। हड्डियों के सही विकास के लिए कैल्शियम युक्त चीजें जैसे दूध, दही और पनीर को खाने में शामिल करें।बच्चों को बाहर का खाना खाने से रोकना चाहिए। इससे उन्हें भूख कम लगती है और वे अन्य जरूरी चीजें नहीं खाते। इसके स्थान पर उन्हें घर पर बना मूंग दाल का चीला, हलवा, ढोकला,नॉनवेज खाते हैं तो मीट,अंडे  भी काफी फायदेमंद होते हैं।

6 से 20 वर्ष तक

बचपन में टीनएज में कदम रखने के दौरान शरीर में कई हामोंनल बदलाव होने के साथ ही नहीं बनते है। इस उम्र में प्रोटीन की जरूरत से ज्यादा होती है। इस उम्र में मिठाई का सेवन लाभदायक होता है।खासकर लड़कियों को पीरियड की शुरुआत होने से और इसके विकास के लिए आयरन कैल्शियम और विटामिन डी की आवश्यकता पड़ जाती है। स्कूल जाने वाले बच्चे से शीरीरिक रूप से ज्यादा एक्टिव होते हैं।उनके लिए केल्शियम बहुत जरूरी है।

21 से 35 वर्ष तक

वयस्क के होते होते एक तरफ से शारीरिक विकास की प्रक्रिया थम जाती है। दूसरी तरफ फिजिकल एक्टिविटी कम हो जाने के कारण कार्बोहाइड्रेट्स की जरूरत कम हो जाती है। वही स्त्रियों में प्रेग्नेंसी के समय अधिक कैल्शियम आयरन, फोलेट, विटामिन बी12 की आवश्यकता बड़ जाती है। ऐसे में हरी पत्तेदार सब्जियां, ब्रोकली, दूध, योगर्ट, पनीर, अंडे, साबुत अनाज और दाल प्रचुर मात्रा में लेना चाहिए। इस उम्र में नमक, चीनी का सेवन कम कर देना चाहिए।

36 से 50 वर्ष तक

बढ़ती उम्र का सबसे अधिक प्रभाव चेहरे पर झुर्रियों के रूप में दिखाई देता है।  इससे बचने के लिए एंटीऑक्सीडेंट्स में को खाने में शामिल करें। रंग बिरंगे फल,सब्जियों,कीवी,सिट्रस, फल, डार्क चॉकलेट में एंटीऑक्सीडेंट्स की प्रचुर मात्रा होती है।  इस उम्र में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और मोटापे की समस्या आम है।ऐसे में बसा का प्रयोग कम ही करना चाहिए मगर हेल्थी फैट जैसे मूफा मुफ़ा और नटस को जरूर लेना चाहिए।खासकर स्त्रियों में इस उम्र तक मेनोपॉज की शुरुआत होने की वजह से कैल्शियम की कमी होने लगती है। इसलिए कैल्शियम युक्त चीजें जैसे डेयरी और सोया उत्पाद के इलावा Sports आदि अधिक मात्रा में लेनी चाहिए।

51 से 70 तक

बुजुर्गों को छोटे बच्चों के समान ही ऊर्जा की जरूरत होती है। इसकी वजह यह है कि इस उम्र में पहुंचने तक कई टिशूज नष्ट होने लगते हैं।ऐसे में प्रोटीन युक्त डाइट अधिक ले। कब्ज से बचने के लिए फाइबर और ज्यादा लेना चाहिए। इसके साथ ही विटामिन बी12 और मिनरल्स को भी अपनी डाइट में जरूर शामिल करें।साबुत अनाज मीट अंडे और फल इन के अच्छे स्रोत हैं।

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