दूसरों की नज़रों में अच्छे न बनकर, अपनी नज़रों में अच्छे बनो

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दूसरों की नज़रों में अच्छे न बनकर, अपनी नज़रों में अच्छे बनो
दूसरों की नज़रों में अच्छे न बनकर, अपनी नज़रों में अच्छे बनो

आजकल के दौर में ज़िन्दगी का सफर किसी के लिए आसान बन जाता है और किसी के लिए बहुत मुश्किल। यह सब कुछ हमारे कर्मो पे भी निर्भर होता है और कुछ हमारे किये कार्यों पर, क्यूंकि आज का युग कलयुग है और इस युग में हमें अनेक प्रकार के लोग मिलते हैं। कुछ लोग अपनी ही ज़िन्दगी में इतने व्यस्त होते हैं की उनको किसी और की परवाह ही नहीं होती, वो सिर्फ अपने लिए जीते हैं, कुछ लोग अपने साथ साथ दूसरों का भी पूरा ख्याल रखते हैं, दूसरों की सहायता करने के लिए और उनका साथ देने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं परन्तु ऐसे लोगों को भी कई बार धोखा मिलता है क्यूंकि कई बार वो सामने वाले को अच्छे से पहचान नहीं पाते और गलत लोग ऐसे अच्छे लोगों का हर वक़्त गलत फायदा उठाते हैं। फिर अंत में आते हैं वो लोग जो अपनी ज़िन्दगी के साथ साथ दूसरों का ख्याल भी रखते हैं उनका हमेशा साथ भी देते हैं परन्तु पहले वो सामने वाले की अच्छे से परख करते हैं की वो कैसा है, उसमे क्या क्या खूबियां हैं और क्या क्या बुराईयां हैं।

दूसरों की नज़रों में अच्छे बनकर, अपनी नज़रों में अच्छे बनो

इसलिए जो लोग सिर्फ अपनी ज़िन्दगी जीते हैं कुछ समय बाद वो तनहा रह जाते हैं क्यूंकि उनके साथ कोई भी अपना नहीं रह जाता उनका साथ देने को और धीरे धीरे ऐसे लोगों के लिए ज़िन्दगी का सफर मुश्किल बनता चला जाता है और सफर उनके लिए भी मुश्किल बन जाता है जो सामने वाले की परख किये बिना ही उसके साथ अपने रिश्ता बनाता है और गलत फेहमी का शिकार बनकर अपने काम और कर्मो पर धयान देने की बजाये दूसरों की और जयादा धयान देता है, फिर उसकी ज़िन्दगी का सफर उसके खुद के लिए ही मुश्किल लगने लगता है।सफर उसके लिए आसान होता है जो पहले अपने कर्म, अपने काम और अपनी ज़िम्मेदारियाँ अच्छे से निभाए फिर उसके बाद दूसरों के कहने पर उनके कार्यों में उनका साथ दे और इसके लिए हमें सबसे पहले सामने वाले के साथ अच्छे से जान पहचान करनी चाहिए की वो इंसान हमारे लिए सही है भी या नहीं।इस सबसे से पहले हमें खुद का मन साफ़ रखना चाहिए और उसके लिए हमें परमात्मा का शुक्रिया करना चाहिए की उसने हमें यह जीवन दान दिया और परमात्मा का सच्चे दिल से धयान करना चाहिए और इसके साथ साथ हमें अपने माँ बाप और बड़े बुज़ुर्गों की सेवा सच्चे दिल से करनी चाहिए क्यूंकि अगर माँ बाप ही न होते तो हमें यह जीवन ही न मिलता।

 जैसे की मेरे भाई मेरे मित्रमनी लाडलाका कहना है कीजूठे सारे रिश्ते और जूठी सारी माया है, सबसे बड़ी जगत जनंनी जिसने हमको जगत दिखाया है और वो है हमारी माँ, क्योंकि अगर हमारी माँ हमें जन्म ही देती तो कैसे पता चलता हमें इस दुनियादारी का, देवीदेवताओं का, धन दौलत का और रिश्ते नातों का।

कभी कभी हम कहते हैं या सोचते हैं यह व्यक्ति बुरा है या वो इंसान सही नहीं है परन्तु, इस से पहले हमें यह सोचना चाहिए की चलो माना दुनियाँ बुरी है, लेकिन हमें अच्छे बनने से किसने रोका है। फिर कभी हम सोचते हैं हम अच्छा कर रहे हैं तो सामने वाला हमारे साथ सही क्यों नहीं करता और हम भी फिर गलत राह पर चलने की सोचते हैं लेकिन, हमें दूसरों की गलत बातों पर खुद को भटकाने की बजाये उसको उसके हाल पर छोड़ देना चाहिए और खुद को सही राह पर ही चलाना चाहिए क्यूंकि हर किसी को अपने कर्मो के अनुसार ही फल मिलता है फिर चाहे वो कर्म अच्छे हो या बुरे और इसकी उदहारण में किसी ने सही कहा है कि “अच्छे के साथ अच्छे रहे…लेकिन बुरे के साथ बुरे नहीं बने… “क्योंकि” पानी से खून साफ कर सकते है लेकिन खून से खून नहीं “। अगर हमारा दिल साफ़ होगा तो हमें दूसरों के सामने अच्छा बनने की जरुरत ही नहीं पड़ेगी क्यूंकि जो इंसान खुद सच्चा हो और मन अच्छा हो तो उसको दूसरों के सामने अपनी अच्छाई दिखने की जरुरत ही नहीं पड़ती।

॥इसलिए हमें दूसरों कि नज़र में अच्छे बनकर सबसे पहले खुद की नज़रों में अच्छे बनना चाहिए और अच्छे कर्म करते रहना चाहिए॥

लेखक: अमित बेरी || समर्थक: प्रिंस शर्मा लाडला

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